Thursday, May 26, 2011

आनंदक रहस्य



देखलहुं आदमीक स्वभावक स्वरुप
जहन जहन बिपत्ति अबै छैन
मोनक कटुता दूर टै छैन
मीठ बोल सहयोगी बनै छैथ
पुनः
समय अनुकूल होइते
मोन जहर भैर जैत छैन
अजब गजब परिवर्तन
तुरंत तुरंत
एके व्यक्ति के
अलग अलग व्यबहार
समय के अंतराल में
केना रक्त के प्रवाह
बदैल देत छैक
भावनाक स्वरुप के
समझ परे छैक
बुझैत समझैत जनैत
मुदा !
समय  हारैत
व्यक्ति स्वयं
घुटन महशुश करैत छैथ
मुदा !
अभ्यास हावी होइत छैन
अभ्यासक परिहास
मुदा !
सब निर्माण
ईश्वर के कैल छैन
प्रिज्म जँका
भावनाओ के
अलग अलग रूप में
परावर्तित करैक छमता
मनुष्यक ह्रदय में बनौने छैथ
विस्मित करैया
मुदा !
कोनो व्यक्ति विशेष नई
निर्माण कर्ता के निर्माण अई
स्वभावक सच स्वरुप तैं
समझनाई थोड़ेक कठिन अई
तैं
एकरा माईन लेला मात्र
प्रसन्नता सहजे भेटनाईये अई

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